संयुक्तांक, वर्ष 2, अंक 4 (सितंबर 2013) और वर्ष 3, अंक 1 (दिसंबर 2013)

इस अंक में

संपादकीय

नजरिया

मध्याह्न भोजन कार्यक्रमः विकृत स्कूल व्यवस्था की मार झेलती एक वृहत कल्पना – डॉ. अनिल सदगोपाल 

सरकारी स्कूल व्यवस्थाः एनजीओकरण से निजीकरण तक – लोकेश मालती प्रकाश

मध्याह्न भोजन की आड़ में धर्म व पूंजी की राजनीति – फिरोज़

समसामयिकी

दिल्ली विश्वविद्यालय में चार-साला स्नातक कार्यक्रम को विद्यार्थियों ने खारिज किया 

गुजरात सरकार का विकास का मॉडल और शैक्षिक ढ़ांचे की स्वनिर्भरता का लबादा

कर्ज़ लेकर मिड-डे मील चलाने को मजबूर शिक्षक

दुनिया की खिड़की

क्या अंधेरे दौर में भी गीत गाए जाएंगे...” – आयुषी रावत

संगठन की रपटें

शिक्षा में बाजारीकरण व सांप्रदायीकरण के खिलाफ रैली व जन-संसद

खिड़किया दंगे व बच्चों, महिलाओं पर इसका प्रभाव

शिक्षा अधिकार मंच, भोपाल की रपट

करारा जवाब

शिक्षा में कॉरपोरेट लूट का समर्थन करने वाले एनजीओ, जवाब दो!

दस्तावेज

अभाशिअम के दिल्ली जन-संसद में पारित प्रस्ताव

उच्च शिक्षा संस्थाओं में आत्महत्याएं

इतिहास के पन्नों से

विद्यार्थी व राजनीति – भगत सिंह

श्रद्धांजली

हम सब दाभोलकर

ओमप्रकाश वाल्मीकि

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